हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पैग़म्बर के विसाल के दिन और इमाम हसन अलैहिस्सलाम की शहादत के अवसर पर यागीपोरा मागाम में अंजुमन-ए-शरई शियाान-ए-जम्मू-कश्मीर के तत्वावधान में मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में एकेश्वरवाद को मानने वाले लोगों ने भाग लिया।
इस अवसर पर अंजुमन-ए-शरई शियाान-ए-जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आगा सैयद हसन अल-मूसवी अस-सफ़वी ने सलवात-ए-मुहम्मदी के फ़ज़ीलत और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि पवित्र क़ुरआन में अल्लाह तआला ने मोमिनों को पैग़म्बर-ए-अकरम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम पर दरूद और सलाम भेजने का आदेश दिया है।
उन्होंने कहा कि सलवात केवल एक दुआ का वाक्य नहीं है, बल्कि रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम से प्रेम, श्रद्धा और अहले-बैत-ए-अतहार अलैहिमुस्सलाम से जुड़ाव की अभिव्यक्ति भी है। आगा सैयद हसन ने कहा कि नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम सभी नबियों और रसूलों में सर्वोच्च स्थान और पद रखते हैं तथा आपकी पवित्र हस्ती पूरी मानवता के लिए हिदायत, नैतिकता, तक़वा, धैर्य, सच्चाई, अमानतदारी, उदारता और अच्छे चरित्र का पूर्ण उदाहरण है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मोमिनों को रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम की सीरत और अहले-बैत अलैहिमुस्सलाम की शिक्षाओं को अपने व्यावहारिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
आगा सैयद हसन ने कहा कि रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम और अहले-बैत-ए-अतहार अलैहिमुस्सलाम का उल्लेख करना तथा उन पर सलवात भेजना पुण्य और सवाब का कारण और अल्लाह की रहमत प्राप्त करने का माध्यम है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नमाज़ और अन्य इबादतों में सलवात-ए-मुहम्मद व आले-मुहम्मद अलैहिमुस्सलाम का विशेष महत्व है और मोमिनों को इसे जागरूकता के साथ अपनी जिंदगी का नियमित हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने सीरत-ए-नबवी के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अल्लाह के नबियों का मूल उद्देश्य इंसानों का मार्गदर्शन, नैतिक प्रशिक्षण और उन्हें गुमराही तथा नुकसान से मुक्ति दिलाना था, जबकि रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम ने उच्च नैतिकता और पूर्ण मानवीय चरित्र का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसका अनुसरण पूरी मानवता के लिए कल्याण का कारण है।
घटना-ए-कर्बला और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के महान बलिदान का उल्लेख करते हुए आगा सैयद हसन ने कहा कि घटना-ए-कर्बला धैर्य, दृढ़ता, त्याग और सत्य एवं सच्चाई पर अडिग रहने की अमर शिक्षा है।
उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और शहीदाने कर्बला ने धर्म, सत्य और सिद्धांतों की रक्षा के लिए अभूतपूर्व बलिदान दिए। उनकी याद केवल शोक मनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके संदेश को व्यावहारिक जीवन में लागू करना भी आवश्यक है।
उन्होंने मोमिनों से जोर देकर कहा कि वे हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम की सीरत, अहले-बैत अलैहिमुस्सलाम की शिक्षाओं और पैग़ाम-ए-कर्बला से मार्गदर्शन प्राप्त करते हुए तक़वा, नैतिकता, सच्चाई, न्याय और मज़लूमों की सहायता को अपने जीवन का आदर्श बनाएं।
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